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Friday, 1 September 2017

गर्भ में पल रहा शिशु कैसे बन जाता है किन्नर या ट्रांसजेंडर

kinner, transgenders

कोई भी शुभ और मंगल कार्य  किन्नरों की दुआओं और मंगल गान के बिना अधूरा रहता है। किन्नर लोग आमतौर वह होते हैं जिन्हें न तो पुरुष और न ही महिला की कैटेगरी में रखा जा सकता है। ट्रांसजेंडर (किन्नर) लोगों में पुरुष और महिला दोनों के ही गुण हो सकते हैं। ऊपर से पुरुष दिखाई देने वाले किसी व्यक्ति में इंटरनल ऑर्गन और गुण महिला के हो सकते हैं और ऐसे ही ऊपर से महिला नजर आने वाले किसी व्यक्ति में पुरुषों वाले गुण और ऑर्गन्स हो सकते हैं। बच्चे की किलकारी घर आँगन में गूंजे ये हर माँ बाप का सपना होता है। लेकिन बच्चे का स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है। यदि बच्चा जन्म से ही विकृति के साथ पैदा हो जाये तो माँ बाप का जीवन नर्क से भी बदतर हो जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने के दौरान ही शिशु के ऑर्गन्स बनते है। शिशु के डेवलपमेंट की प्रोसेस के दौरान ही किसी चोट, टॉक्सिक खान-पान, हॉर्मोनल प्रॉब्लम जैसी किसी वजह से पुरुष या महिला बनने के बजाय शिशु में दोनों के ही ऑर्गन्स आ जाते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेग्नेंसी के शुरुआती 3 महीने काफी विशेष होते हैं और इस दौरान सबसे ज्यादा सावधानी बरती जानी चाहिए। यहां जानिए किसी शिशु के ट्रांसजेंडर बनने के संभावित कारण।
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1. नशा तथा धूम्रपान - गर्भावस्था के दौरान नशे का अत्यधिक सेवन बच्चे को नुकसान पहुंचाता है, तथा विभिन्न अंगों में विकृति उत्पन्न कर सकता है।
2. मेडिसिन्स - प्रेग्नेंसी में महिला ने कोई ऐसी दवा (Teratogenic Drug) ली हो जिससे शिशु को नुकसान हो सकता हो।
3. टॉक्सिक फ़ूड - अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला ने टॉक्सिक फ़ूड जैसे कि केमिकली ट्रीटेड या पेस्टिसाइड्स वाले फ्रूट-वेजिटेबल्स आदि खाएं हों।
4. एक्सीडेंट या बीमारी- प्रेग्नेंसी के 3 महीने में कोई ऐसा एक्सीडेंट या बीमारी जिससे शिशु के ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा हो।
5. जेनेटिक डिसऑर्डर- 10-15% मामलों में जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण भी शिशु पर असर पड़ता है। और शिशु विकृत हो सकता है।
6. इडियोपैथिक या अज्ञात - ट्रांसजेंडर बच्चे पैदा होने के अधिकांश मामले इडियोपैथिक होते हैं यानि इनके कारणों का पता नहीं चल पाता।
7. अबॉर्शन की दवा- अगर महिला ने बगैर डॉक्टरी सलाह लिए अपने मन से अबॉर्शन की दवा या घरेलू उपाय आजमाएं हो।
8. बुखार- प्रेग्नेंसी के शुरूआती 3 महीने में महिला को बुखार आया हो और उसने कोई हेवी मेडिसिन ले ली हो।
प्रेग्नेंसी में रखें ये सावधानी जिस से बच्चा रहेगा स्वस्थ
1. बगैर डॉक्टर की सलाह से कोई भी दवा न खाएं। बुखार या दर्द जैसी आम तकलीफ के लिए भी नहीं।
2. हेल्दी डाइट लें। किसी भी तरह के टॉक्सिक फ़ूड या ड्रिंक लेना बिलकुल अवॉइड करें।
3. थाइरॉइड प्रॉब्लम, डायबिटीज़, मिर्गी जैसी बीमारियों में डॉक्टर की सलाह के बाद ही प्रेग्नेंसी प्लान करें।
4. प्रेग्नेंसी के शुरूआती 3 महीनों में बुखार या कोई दूसरी तकलीफ को भी सीरियसली लेकर डॉक्टर को दिखाएं।
5. प्रेग्नेंसी के दौरान शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों का सेवन बिलकुल न करें। नींद की दवा भी पूछकर ही लें।
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